मै, सादात अनवर माननीय न्यायालय एवं भारत सरकार से अपील करता हूँ.

अयोध्या के मंदिर मस्जिद विवाद के समाधान हेतु माननीय न्यायालय एवं भारत सरकार पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर जी के मॉडल का भी अध्यन करें।
माननीय न्यायालय से निवेदन है कि दोनों समुदायों में आपसी समन्वय बनाने में चंद्रशेखर जी द्वारा मंदिर मस्जिद विवाद के समाधान की पहल का भी अध्यन कराया जाये ताकि टकराव के बिना आपसी सहमति के आधार पर समन्वय के साथ शांतिपूर्वक समाधान किया जा सके।

ज्ञात रहे कि अयोध्या के मंदिर मस्जिद विवाद के समाधान हेतु चंद्रशेखर जी ने अपने प्रधानमंत्रित्व काल में एक सार्थक प्रयास किया था। ऐसा माना जाता है कि चंद्रशेखर जी के प्रयास से दोनों समुदाय के लोगों में सहमति बन गई थी। इसी बीच उनकी सरकार गिर गई। लोगों का मानना है कि यदि चंद्रशेखर जी को प्रधानमंत्री के रूप में कुछ और समय मिलता तो अयोध्या के मंदिर मस्जिद विवाद का हल आपसी सहमति के आधार पर अवश्य हो जाता। अब जबकि माननीय न्यायालय ने एक पहल कर दोनों समुदाय के लोगों को आपसी बातचीत एवं सहमति बनाने हेतु कहा है ऐसे में यदि चंद्रशेखर जी द्वारा बनाये गए मॉडल का अध्यन किया जाये तो समस्या को समझने और उसके समाधान में मदद मिलेगी।

मै, सादात अनवर माननीय न्यायालय एवं भारत सरकार से अपील करता हूँ कि अयोध्या के मंदिर मस्जिद विवाद को सुलझाने हेतु कृपया पूर्व प्रधानमंत्री श्री चंद्रशेखर जी के मॉडल का भी अध्यन किया जाये।

अयोध्या-विवाद: 

प्रधानमंत्री का पद संभालने के बाद मेरे सामने तीन बड़े सवाल थे –अयोध्या का मंदिर – मस्जिद विवाद, पंजाब में आतंकवाद और कश्मीर की समस्या ! यह बात तो सभी स्वीकार करते हैं कि मुझे अगर दो महीने का वक़्त मिल जाता तो मंदिर-मस्जिद विवाद सुलझ गया होता ! जनता दल बनने के बाद से ही मैं यह कहता रहा हूं कि नेतृत्व इस सवाल पर ईमानदार नहीं है ! समस्या के मूल में जाने की कोशिश नहीं कि गयी है ! मेरी यह धारणा है कि भारत की जनता पढ़े-लिखे लोगों की कसौटी पर अनपढ़ भले ही मानी जाये लेकिन उससे अगर खुलकर बात की जाये तो वह हमेशा सहयोग करती है और असंभव काम कर दिखाती है !

विश्व हिन्दु-परिषद ने उन दिनों कहा कि वे आन्दोलन करेंगे ! वे मुझसे मिलना चाहते थे ! मैं स्वयं उनकी एक मीटिंग में गया ! सुरक्षा अधिकारीयों ने आपत्ति की ! मैंने उनसे कहा कि सब परिचित है, मेरे मित्र है, मेरे प्रति हिंसा की बात तोछोड़ दीजिए ! कोई कठोर बात भी नहीं करेंगे और मै मीटिंग में गया ! मेरे सामने उत्तेजनापूर्ण बात की गयी ! मैंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि आपने यह रुख अपनाया तो मेरे लिए कोई विकल्प नहीं बचेगा सिवाए कठोर कदम उठाने के ! यह सरकार का कर्तव्य हो जायेगा ! मस्जिद को बचाने के लिए जो भी करना होगा, सरकार करेगी ! जरुरत पड़ने पर गोली चलानी पड़े तो मुझे कोई हिचक नहीं होगी ! आप लोग बातचीत का रास्ता अपनाये !

विश्व हिन्दुपरिषद के लोंगो का कहना था कि बातचीत के लिए दूसरा पक्ष तैयार नहीं ! मैंने कहा कि यह मेरे ऊपर छोडिये ! मैंने बाबरी मस्जिद एक्शन कमेटी के नेताओ से बातचीत की ! उनसे खुलकर बात हुई ! उनसे मैंने कहा कि हिन्दुस्तान में करीब साढ़े सात लाख गाँव में हिन्दू-मुसलमान साथ रहते है ! कोई भी सरकार हर गाँव की सुरक्षा के लिए फोज तैनात नहीं कर सकती ! जो लोग साप्रदायिकता बढ़ाएंगे और गाँव-गाँव में दंगे करवाएंगे, वे बेगुनाह लोंगों की मौत के जिम्मेदार होंगे ! आपको तय करना हैं कि हजारो लोंगों की जान जाये या बातचीत से रास्ता निकला जाये ! आप लोग चुन लीजिये, विकल्प ज्यादा नहीं हैं ! उन लोंगों का कहना था कि विश्व हिन्दुपरिषद इसके लिए तैयार नहीं होगी ! मैंने विश्व हिन्दुपरिषद और बाबरी मस्जिद एक्शन को एकसाथ बात करके समस्या का हल निकालने के लिए तैयार कर लिया ! भैरोसिंह शेखावत और शरद पवार से कि मुलायम सिंह से सलाह की जायें और दोनों पक्ष से बात करके रास्ता निकाले ! एक स्थिति ऐसी आई किदोनों पक्ष सहमत थे, समाधान सामने था !
उच्तम न्यायालय के निर्णय को मानने के लिए दोनों पक्ष के लोग तैयार हो गए थे ! बाबरी मस्जिद के अनेक लोंगों ने कहा था कि अगर ये यह सवित हो जाये कि वहां कोई मंदिर रहा है तो वे मस्जिद बनाये रखने का आग्रह छोड़ देंगे ! मैंने सोचा था कि क्यों ना पुरातत्व विभाग से कहें कि वह खुदाई कराके इसका पता लगायें ! विश्व हिन्दुपरिषद और बाबरी मस्जिद के लोग खुले आम कुछ कहने के लिए तैयार नहीं थे, लेकिन वे सिद्धांततह यह मां गए थे कि सुप्रीमकोर्ट का जो भी फैसला होगा वे मानेंगे सुप्रीमकोर्ट सलाह देने के लिए नहीं, मान्य निर्णय देने के लिए तैयार था ! संविधान में धारा १३८ बी के तहत ऐसे मसलो पर सुप्रीमकोर्ट कि सलाह की व्यस्था है जो हर पक्ष पर लागु हती हैं !

सुप्रीमकोर्ट तीन महीने में फैसला देने के लिए तैयार था ! दोनों धर्म के नेताओं का सहयोग निश्चित था ! चारो तरफ ये चर्चा चाल गयी कि अब निर्णय हो जायेगा ! इसी बीच हरियाणा के सिपाहियों पर जासूसी का बहाना बना कर कांग्रेस ने संकट पैदा किया और सरकार ने त्याग पत्र दे दिया ! कुछ लोग सुझाव देते है कि मंदिर और मस्जिद दोनों एक जगह बना देना चाहिए ! जबतक ये बात चलती रहेगी, इसका समाधान नहीं हो सकता !

मेरी दृष्टि में एक ही जगह मंदिर व मस्जिद बनाना उचित नहीं है ! इससे झगडे का अंत नहीं होगा ! इस समस्या का समाधान आपसी समझदारी और लेनदेन की भावना से ही किया जा सकता है ! उस समय दोनों पक्ष इसके लिए तैयार हो गये!

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